साहित्य प्रतिभा

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Wednesday, 14 September 2011

HINDI GAZAL

मुझे जिंदगी अब बुलाती नहीं |
थपकियों से अपनी सुलाती नहीं|

मै बार-बार सोचता हूँ अब उसे,
क्यों खयालों से वो जाती नहीं|

तरसना,तड़पना आदत हो गई,
क्यों वक्त पर दर्शन दिखाती नहीं|

उसकी राह  में |बैठा हूँ नजरें लगाये,
वादा करके भी क्यों आती नहीं|

अब तो शायद मुश्किल लगता है,
न उसकी कोई खबर-पाती  नहीं |

                                        -  विजय


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